यह पूर्वी उत्तर प्रदेश की खेती का सामान्य मौसमी कैलेंडर है। कटियारी के निचले खेतों में पानी देर तक ठहर सकता है। बोआई और रोपाई का समय तय करते समय खेत की नमी, जल निकासी और उस वर्ष की बारिश का ध्यान रखें।
खरीफ: जून से नवंबर
- धान की नर्सरी आमतौर पर जून में तैयार की जाती है। रोपाई का समय मानसून और खेत की स्थिति पर निर्भर करता है।
- बाढ़ या जलभराव वाले खेतों में रोपाई से पहले स्थानीय कृषि अधिकारी से सलाह लें।
- बाढ़ में भीगे बीज का उपयोग करने से पहले उसकी गुणवत्ता की जाँच कराएँ।
- मक्का और अरहर जैसी फसलों के लिए जल निकासी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दें।
रबी: नवंबर से अप्रैल
- गेहूँ की बोआई आमतौर पर नवंबर–दिसंबर और कटाई मार्च–अप्रैल में होती है।
- खरीफ की कटाई देर से हो तो रबी की किस्म और बोआई का समय कृषि विशेषज्ञ से पूछें।
- सरसों और मसूर की खेती का निर्णय खेत की नमी तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लें।
बाढ़ वाले वर्षों में
जल निकासी और खेत की स्थिति का आकलन करने के बाद बोआई की तैयारी करें। फसल बीमा या राहत से जुड़ी जानकारी आधिकारिक सूचना से जाँचें।
फसल की किस्म, उर्वरक और कीट प्रबंधन की सलाह के लिए उत्तर प्रदेश कृषि पोर्टल तथा स्थानीय कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।